Chhattisgarh Bhoramdeo Temple : छत्तीसगढ़ का रहस्यमय और आकर्षक पर्यटन स्थल

Published On: June 3, 2026
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Chhattisgarh Bhoramdeo Temple : छत्तीसगढ़ का रहस्यमय और आकर्षक पर्यटन स्थल यहाँ सभी पिकनीक और शिव जी के दर्शन करने आते है | भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित एक प्राचीन मंदिर हैजो कवर्धा से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भोरमदेव मंदिर को चौरागांव नामक गांव में 1000 वर्ष पुराना मंदिर बताया जाता है।

भोरमदेव मंदिर का निर्माण लगभग सातवीं से 11वीं शताब्दी के बीच का बताया जाता है। इस मंदिर में खजुराहो मंदिर की बहुत सी झलक देखने को मिलती है, जिसके कारण भोरमदेव मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहा जाता है।

कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव मंदिर महादेव को समर्पित है। मंदिर को 5 फीट ऊंचे चबूतरे पर निर्मित किया गया है जिसमें तीन प्रवेश द्वार बनाया गया है जिसकी ऊंचाई 60 फुट और चौड़ाई 40 फीट है मंडप के बीच चार स्तंभ है तथा किनारे की ओर 12 स्तंभ बनाए गए हैं।

Bhoramdeo

Chhattisgarh Bhoramdeo Temple

ऐतिहासिक और पुरातात्विक विभाग के अनुसार, भोरमदेव मंदिर का इतिहास 10वीं से 12वीं शताब्दी के बीच कलचुरी काल माना जाता है। भोरमदेव मंदिर के निर्माण का श्रेय फैनिनगवंश के लक्ष्मण देव राय और गोपाल देव को दिया जाता है। मंदिर के परिसर को अक्सर “पत्थर में बिखरी कविता” के रूप में जाना जाता है। इस क्षेत्र के गोंड आदिवासी भगवान शिव की पूजा करते थे, जिन्हें वे भोरमदेव कहते थे, इसीलिए इस मंदिर को भोरमदेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इतिहासकारों के मुताबिक, यह मंदिर पूरे खजुराहो समूह से भी पुराना है।

भोरमदेव मंदिर के आर्किटेक्चर के बारे में बात करें तो इस मंदिर की संरचना कोणार्क मंदिर और खजुराहो से मिलती जुलती है। हाँ, इस मंदिर में भी कोणार्क मंदिर और खजुराहो के समान स्थापत्य शैली में कामुक मूर्तियों के साथ कुछ वास्तुशिल्प विशेषताओं को जोड़ा गया है। गर्भगृह मंदिर का प्राथमिक परिक्षेत्र है जहाँ शिव लिंग के रूप में पीठासीन देवता शिव की पूजा की जाती है।

मंदिर की पूर्व की ओर एक प्रवेश द्वार के साथ बनाया गया है जो एक ही दिशा का सामना करता है। इसके अतिरिक्त, दक्षिण और उत्तर दिशाओं के लिए दो और दरवाजे खुलते हैं। हालांकि, पश्चिमी दिशा की ओर कोई दरवाजा नहीं है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार में गंगा और यमुना की प्रतिमाएँ दिखती हैं। मंदिर में भगवान शिव और भगवान गणेश के साथ साथ भगवान विष्णु के दस अवतारों की छवियों को भी दीवारों में चित्रित देखा जा सकता है। Chhattisgarh Bhoramdeo Temple

कला शैली

मंदिर के मुख उत्तर की ओर है। यह मंदिर नागर शैली का अत्यंत उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर में तीन द्वार से प्रवेश किया जा सकता है। यह मंदिर पाँच फुट ऊँचे चबूतरे पर स्थित है। तीनों द्वार से सीधे मंदिर के मंडप में प्रवेश किया जा सकता है। मंडप की लंबाई 60 फुट है और चौड़ाई 40 फुट है।

मंडप के बीच में चार खम्भे हैं तथा किनारों पर बारह खम्भे हैं जो मंदप की छत को संभालते हैं। सभी खम्भे अत्यंत सुंदर और कलात्मक हैं। प्रत्येक खम्भे पर किचन बनाई गई है, जो कि छत का भार संभालती है। मंडप में लक्ष्मी, विष्णु और गरुड़ की मूर्तियाँ हैं, साथ ही भगवान के ध्यान में बैठे हुए एक राजपुरुष की मूर्ति भी है।

मंदिर के गर्भगृह में कई मूर्तियाँ स्थापित हैं, जिनके बीच में एक काले पत्थर का शिवलिंग है। गर्भगृह में एक पंचमुखी नाग की मूर्ति, नृत्य करते हुए गणेश जी की मूर्ति, ध्यानमग्न राजपुरूष और उपासना करते हुए एक स्त्री-पुरूष की मूर्ति भी है। मंदिर के ऊपरी भाग में शिखर नहीं है। मंदिर की चारों ओर बाहरी दीवारों पर विष्णु, शिव, चामुंडा, और गणेश जैसी मूर्तियाँ स्थापित हैं। साथ ही, लक्ष्मी-विष्णु और वामन अवतार की मूर्तियाँ भी दीवार पर हैं। देवी सरस्वती और अर्धनारीश्वर की मूर्तियाँ भी यहाँ प्रतिष्ठित हैं। Chhattisgarh Bhoramdeo Temple

भोरमदेव मंदिर की मुख्य विशेषताएं क्या क्या है?

यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर कृत्रिमतापूर्वक पर्वत शृंखला के बीच स्थित है, यह लगभग 7 से 11 वीं शताब्दी तक की अवधि में बनाया गया था। यहाँ मंदिर में खजुराहो मंदिर की झलक दिखाई देती है, इसलिए इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” भी कहा जाता है। मंदिर का मुख पूर्व की ओर है। Chhattisgarh Bhoramdeo Temple

ऐसे पहुंच सकते हैं मंदिर

भोरमदेव मंदिर से सबसे निकट राजधानी रायपुर का हवाई अड्डा है, जो भोरमदेव से लगभग 130 किलोमीटर दूर है। यदि आप ट्रेन से भोरमदेव मंदिर तक पहुंचना चाहते हैं, तो इसके लिए सबसे निकट रेलवे स्टेशन रायपुर है, जो लगभग 120 किलोमीटर दूर है। बस रूट से भी कवर्धा राज्य के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है, जैसे कि रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग शहर और अन्य शहर। Chhattisgarh Bhoramdeo Temple

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