पारिजात या हरसिंगार पौधे || Parijat or Harsingar plant || के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी

पारिजात या हरसिंगार पौधे || Parijat or Harsingar plant || के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी

हरसिंगार का पौधा या पारिजात का पौधा

Parijat or Harsingar plant

Harsingar ka Paudha ya Parijat ka Paudha

पारिजात का अंग्रेजी में नाम – नाइट जैसमिन 
पारिजात का वैज्ञानिक या वानस्पतिक नाम – निक्टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस
परिजात का हिंदी और स्थानीय नाम – हरसिंगार, पारिजात 

Parijat or Harsingar plant भारत का एक प्रमुख औषधियां प्लांट है। पारिजात का पौधा सुंदर पुष्प वाला पौधा है। पारिजात वृक्ष को कल्पवृक्ष और देव वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है। पारिजात का पौधा पूरे भारतवर्ष में पाया जाता है। पारिजात का वृक्ष को अनेक नामों से जाना जाता है। इसे हरसिंगार, शेफाली, शिउली नाम से जाना जाता है। पारिजात वृक्ष का पुष्प पवित्र है। यह पौधा अपने फूलों के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि पारिजात के फूल रात में खिलते हैं और यह सुबह जमीन में गिर जाते हैं। इसके फूलों से बहुत सुगंध आती है। अगर इसका एक पौधा भी, आपके घर के आसपास लगा हो। तो वहां का वातावरण सुगंधित रहता है। पारिजात के पौधे को आप अपने घर में, आंगन में या गमले में आराम से लगा सकते हैं। पारिजात पौधे के पुष्प विष्णु भगवान जी और लक्ष्मी जी को बहुत प्रिय है। उनकी पूजा में यह पुष्प चढ़ाए जाते हैं। परिजात पौधे का जिस तरह से धार्मिक महत्व है। उस तरह से इसका आयुर्वेद में भी बहुत महत्व है। परिजात से बहुत सारे रोगों को ठीक किया जा सकता है। 

पारिजात का पेड़ और फूल दोनों ही बहुत सुन्दर होता है। पारिजात का झाड़ 10 से 15 फीट तक लंबा होता है। इसका पौधा शुरुआत में झाड़ियों के समान होता है और छोटे आकार का होता है। पारिजात पौधे की पत्तियों का आकार पान की पत्तियों के समान रहता है। इसकी पत्तियां हल्की सी खुरदरी होती हैं। इसकी पत्तियों में शिराएँ को साफ देखा जा सकता है। पारिजात पौधे का पुष्प बहुत सुंदर रहता है। पारिजात पुष्प का आकार छोटा रहता है। यह पुष्प समूह में उगता है। पारिजात पौधे में फल लगते हैं। इसके फल शुरू में हरे कलर के रहते हैं, उसके बाद यह सुखकर काले हो जाते हैं। परिजात पौधे को आप कलम के द्वारा आसानी से अपने बाग या गमले में लगा सकते हैं। 

पारिजात पुष्प की विशेषता यह है, कि यह रात में खिलता है और पूरी रात खिला रहता है और सुबह के समय यह पुष्प जमीन में गिर जाता है। पारिजात का पुष्प प्राचीन मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन से निकाला था, जिससे स्वर्ग के महाराजा इंद्र ने अपने साथ स्वर्ग लेकर गए थे। 

पारिजात वृक्ष का धार्मिक महत्व और पारिजात ट्री हिस्ट्री – Religious importance of parijat tree and history of parijat tree

पारिजात वृक्ष का महत्व इस प्रकार है – कि एक बार नारद मुनि श्री कृष्ण से मिलने आए और उन्होंने अपने साथ पारिजात का फूल लाया था। पारिजात फूल उन्होंने श्री कृष्ण जी को दिया और श्री कृष्ण जी ने अपनी पत्नी रुकमणी को यह पुष्प दे दिया। लेकिन जब श्री कृष्ण की दूसरी पत्नी सत्यभामा को पता चला, कि स्वर्ग से लाए पारिजात के पुष्प को श्री कृष्ण जी ने रुक्मणी जी को दे दिया है। तब उन्हें बहुत क्रोध आया और उन्होंने श्रीकृष्ण के सामने जिद पकड़ ली, कि उन्हें अपनी वाटिका में पारिजात वृक्ष चाहिए। तब श्री कृष्ण ने उन्हें समझाया। मगर सत्यभामा नहीं माने। 

तब सत्यभामा की जिद को श्री कृष्ण जी को मानना पड़ा और श्री कृष्ण जी ने अपने दूत को पारिजात वृक्ष लेने के लिए स्वर्ग भेजा। इंद्र ने श्री कृष्ण के दूत को पारिजात वृक्ष देने से मना कर दिया। दूत ने आकर यह बात श्री कृष्ण जी को बताई। तब स्वयं श्री कृष्ण जी इंद्र पर आक्रमण करने के लिए गये और इंद्र को पराजित कर पारिजात वृक्ष को जीत लाएं। श्री कृष्ण जी ने पारिजात वृक्ष जी को सत्यभामा जी की वाटिका में लगा दिया। 

मगर पारिजात वृक्ष के पुष्प रुकमणी जी की वाटिका में गिरते थे। जब भी हवा चलती थी। तब रुकमणी जी की वाटिका में गिरते थे। इस तरह पारिजात वृक्ष स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गया। इस वृक्ष को लेकर और भी बहुत सारी मान्यताएं हैं। 

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के पास कुंटूर में एक विशेष प्रकार का पारिजात वृक्ष पाया जाता है, जो हमारे घर के आस-पास मिलने वाले पारिजात वृक्ष से अलग है और इस पारिजात वृक्ष को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पर आते हैं। यह पारिजात वृक्ष सबसे पुराना है। यह पारिजात वृक्ष महाभारत काल का माना जाता है। यहां पर शिव भगवान जी का मंदिर भी बना हुआ है। पारिजात वृक्ष के महत्व को देखते हुए, भारत सरकार ने पारिजात वृक्ष पर एक डाक टिकट भी जारी किया है। 

पारिजात पौधे का औषधीय गुण, महत्व और फायदे – Medicinal properties, importance and benefits of Parijat plant

पारिजात के पौधे का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ औषधीय महत्व है। पारिजात पौधे की पत्तियां, फूल और तने का उपयोग शरीर के रोगों को दूर करने में किया जाता है। पारिजात के वृक्ष में एंटीबैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण पाया जाता है। पारिजात के वृक्ष बहुत सुगंधित रहता है। 

पारिजात के पेड़ की पत्तियों के फायदे – Benefits of parijat tree leaves

  1. अगर आपको बहुत पुराना जोड़ों का दर्द हो या आपके शरीर में दर्द होता हो, तो आप पारिजात की पत्तियों का प्रयोग कर सकते हैं। आप पारिजात की पत्तियों को तोड़कर इसे साफ पानी से धो लें और इस को पानी में उबाल लें। जब पानी आधा हो जाये। आप इसका सेवन करें। आपको आराम मिलेगा। 
  2. पारिजात की पत्तियों को उबालकर पीने से साइटिका की परेशानी दूर होती है। 
  3. अगर आपके शरीर में सूजन है और आपको दर्द हो रहा हो, तो आप पारिजात की पत्तियों का काढ़ा बनाकर उसका सेवन कर सकते है। 
  4. यह पारिजात की पत्तियों को पीसकर शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है। 
  5. पारिजात की पत्तियों को पीसकर त्वचा में लगाने से त्वचा संबंधी रोग ठीक होते हैं। 
  6. पारिजात की पत्तियों से बने तेल का उपयोग, त्वचा संबंधी बीमारी को ठीक करने में किया जा सकता है। 
  7. पारिजात के पत्तों का काढ़ा बनाकर प्रयोग करने से बुखार उतर जाता है। 
  8. पेट के कीड़ों की समस्या में पारिजात का उपयोग किया जाता है। पारिजात पेड़ के ताजा पत्तों के रस का प्रयोग पेट के कीड़े की समस्या दूर करते है। यह पेट के हानिकारक कीड़े को समाप्त कर देते है। 

पारिजात के बीजों का फायदे – Benefits of Parijat seeds

  1. पारिजात के बीजों का प्रयोग रूसी की समस्या के लिए किया जा सकता है। पारिजात के बीजों का पेस्ट बनाकर उसे सिर में लगाने से रूसी की समस्या दूर होती है। 
  2. पारिजात के बीज का पेस्ट बनाकर, फोड़े फुंसी और घाव में लगाने से घाव ठीक हो जाता है। 

पारिजात के पेड़ की छाल के फायदे – Benefits of parijat tree bark

पारिजात की छाल का चूर्ण का प्रयोग खांसी को ठीक करने के लिए किया जाता है। 

पारिजात के जड़ के फायदे – Benefits of parijat root

पारिजात की जड़ का प्रयोग नाक से खून बहने और कान से खून बहने की समस्या को रोकने के लिए किया जाता है। इसके लिए पारिजात की जड़ का प्रयोग किया जाता है। नाक में खून बहने और कान में खून बहने की समस्या ठीक होती है। 

पारिजात का वृक्ष को कैसे लगाया या उगाया जाता है – How to plant or grow Harsingar plant or Parijat plant

पारिजात पौधा या हरसिंगार पौधा को आप अपने घर में गमले में या अपने बगीचे में लगा सकते हैं। पारिजात पेड़ को लगाने के लिए दो तरीके हैं। पारिजात ट्री को आप इसके बीज के द्वारा लगा सकते हैं और परिजात वृक्ष की कलम से लगा सकते हैं। परिजात पौधा को बीज से लगाने के लिए, आपको इसके बीज चाहिए रहते हैं। पारिजात के पौधे के एक फल में आपको दो बीज देखने के लिए मिल जाते हैं। आप बीज को सावधानीपूर्वक फल से निकाल लीजिए और इस बीज को आप नमी में अंकुरित कीजिए। उसके बाद आप इसको मिट्टी में लगा दीजिए। 1 सप्ताह बाद आपको इसमें छोटा छोटा पौधा देखने के लिए मिल जाएगा। 

परिजात प्लांट को कलम के द्वारा भी लगाया जा सकता है। पारिजात ट्री को कलम से लगाने के लिए, पौधे के मुख्य तने की कलम का चुनाव करना चाहिए। पौधे की और जिस भी कलम को आप चुनाव करते हैं। वह कलम स्वस्थ होनी चाहिए। आप कलम को तने से तोड़ लीजिए या इसे शार्प कट लीजिए। उसके बाद आप तने की जितनी भी पत्तियां हैं। उनको अलग कर दीजिए। 

उसके बाद आप पौधे को जमीन में लगा दीजिए और पानी डाल दीजिए। पौधे को आप जमीन में लगाते हैं, तो पौधे को डायरेक्ट सनलाइट पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि पौधा कि आप कलम करते हैं, तो उससे पौधे को शॉक लगता है और सनलाइट पड़ने पर उसके सूखने की आशंका रहती है। इसलिए पौधे को छाया वाली स्थान में लगाइए। कुछ दिनों बाद पौधे में नई पत्तियां आना शुरू हो जाएंगी। 

पारिजात प्लांट को आप नर्सरी से भी लेकर आ सकते हैं। नर्सरी में आपको अलग-अलग प्राइस में पौधे मिल जाते हैं। इसके अलावा हरसिंगार या पारिजात का पौधा आप ऑनलाइन भी ले सकते हैं। आपको पारिजात पौधे की बहुत सारी प्रजातियां भी मिल जाती हैं। 

पारिजात का फूल या हरसिंगार का फूल – Parijat or Harsingar flower

पारिजात या हरसिंगार का फूल बहुत सुंदर रहता है। पारिजात वृक्ष के फूल बहुत आकर्षक होता है। पारिजात वृक्ष का फूल सफेद रंग का होता है। पारिजात का फुल छोटे आकार का होता है। पारिजात फूल का पौधा की ऊंचाई 10 से 15 फीट है। पारिजात के पुष्प रात के समय खिलता है। परिजात पुष्प बहुत ही सुगंधित रहता है। परिजात फूल की सुगंध बहुत दूर-दूर तक फैली रहती है। पारिजात का पुष्प पूरी रात पौधे में लगे रहते हैं। पारिजात पुष्प सुबह के समय झड़ना शुरू हो जाते हैं और खिले हुए सारे फूल झड़ जाते हैं। 

पारिजात फूल को हरसिंगार इसलिए कहा जाता है, क्योंकि पारिजात के फूलों से श्री हरि विष्णु जी का श्रृंगार किया जाता है। इसलिए इसे हरसिंगार के नाम से जाना जाता है। 

पारिजात के फूल देवी लक्ष्मी जी के भी प्रिय हैं। यह उनकी पूजा करने के समय देवी लक्ष्मी मां को अर्पित किए जाते हैं। इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती है और घर में सुख संपत्ति आती है। 

पारिजात के फूल सफेद रंग के रहते हैं। पारिजात के फूल में नारंगी रंग की डंडी देखने के लिए मिलती है, जो बहुत सुंदर लगती है। पारिजात के फूल गुच्छों में खिलते हैं। 

हरसिंगार या पारिजात का बीज – Harsingar or Parijat seed

हरसिंगार या पारिजात का बीज फूल खिलने के बाद, पारिजात के वृक्ष में लगता है। पारिजात का फल प्रारंभिक अवस्था में हरे कलर का रहता है और फल पकने के बाद यह भूरे कलर के हो जाता है। इस फल के अंदर आपको दो बीज देखने के लिए मिलते हैं। बीज पकने के बाद, यह स्वतः ही जमीन पर गिर जाते हैं। पारिजात के बीज भी औषधीय गुणों से भरे रहते हैं। 


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